गोण्डा

गोण्डा का सम्पूर्ण परिचय उसके नाम में ही है। गोण्डा के नाम का उदगम एक हिन्दी शब्द ‘गौशाला‘ से हुआ है क्योकि प्राचीनकाल में यहाँ रघुकुल साम्राज्य का वास था जो उस समय ‘कोसाला‘ के नाम से विख्यात था। गोण्डा एक कृषिप्रधान जिला है जो अपने शांत वातावरण और एवं लोक संस्कृति के लिए पहचाना जाता है। घाघरा नदी गोण्डा को दो भागों में बांटती है। उत्तर प्रदेश का जिला मुख्यालय गोण्डा में स्थित है और साथ ही देवीपाटन डिविज़न का प्रशासनिक केन्द्र भी यहाँ मौजूद है। गोण्डा कुल 3,404 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है और यहाँ की कुल आबादी लगभग 3.51 लाख है। जिसमें शिक्षित लोगों का प्रतिशत 23.10 है।

भ्रष्टाचार का होगा निकास अब जिले में होगा विकास
  हाथी का बटन दबाएंगे गोण्डा का भविष्य बनाएंगे

इसके अतिरिक्त गोण्डा में हस्तशिल्प, कला, इंटीरियर डिज़ाइनिंग (पीओपी कार्य), आभूषण निर्माण, आदि के लिए मशहूर है। गोण्डा की भूमि से हिन्दी साहित्य के अनेक बुद्धिजीवी महानायकों ने जन्म लिया और गोण्डा सहित उत्तर प्रदेश का नाम रौशन किया है। इसके साथ ही बु़द्ध संस्कृति के प्रारम्भ की एक झलक भी यहाँ की इमारतों और मंदिरों में देखने को आसानी से मिल सकता है। देश के स्वतंत्रता संग्राम में भी गोण्डा के वासियों ने सजक और मजबूत योगदान देकर बेहद महत्वपूर्ण भूमिका अदा की है और स्वतंत्रता से जुड़ी अनेक कहानियाँ गोण्डा की हवा में खुशबू की तरह बहती है। जहाँ एक ओर गोण्डा, उत्तर प्रदेश की विकसित होती रूपरेखा का सुन्दर हिस्सा है वहीं दूसरी ओर केन्द्र सरकार और राज्य सरकार के आपसी मदभेदों के कारण गोण्डा को सभी योजनाओं और संसाधनो का पूर्ण लाभ नहीं मिल पा रहा हैं। जिसके कारण गोण्डा विकासशील एवं आधुनिक शहरों की दौड़़ में पिछड़ता जा रहा है।

गोण्डा की समस्याएं

  • सत्ताधारी पार्टी द्वारा कानून व्यवस्था का उल्लंघन एवं प्रान्त में भ्रष्टाचार में बढ़ोत्तरी
  • कमजोर एवं पुरानी पद्धति से चली आ रही शिक्षा प्रक्रिया
  • बच्चों के खेलने के लिए स्टेडियम उपलब्ध नहीं है
  • सुव्यवस्थित चिकित्सालयों और शैक्षिक संस्थानों की कमी
  • अन्य प्रान्तों की तुलना में कम विकासात्मक गतिविधियाँ
  • पर्यावरण की अनदेखी और स्वच्छता का अभाव
  • कानून प्रर्वतन रणनीतियों में अभाव
  • स्मारकों के रखरखाव में कमी
  • शिक्षा एवं रोजगार अवसरों में कमी
  • खराब सड़कें