बदहाल व्यवस्था और सिसकता यूपी

बदहाल व्यवस्था और सिसकता यूपी

जनसंख्या की दृष्टि से देश का सबसे सघन राज्य, उत्तर प्रदेश वर्तमान परिवेश में संघर्षो से जूझता नजर आ रहा हैं। वर्तमान सरकार ने 'उम्मीदों का प्रदेश' का नारा तो दिया लेकिन अपने चार वर्ष से अधिक के शासन काल में मजबूर प्रदेशवासियों की सारी उम्मीदें भी छीन ली हैं। सुबह के उगते सूरज के साथ अगर कोई व्यक्ति सकरात्मक उम्मीद के साथ आगे बढ़ना चाहता है तो बलात्कार, दुराचार, लूट-पाट, हत्या जैसी घटनाओं से भरा पड़ा अखबार उसे घेर लेता हैं। वो एक बार फिर से निराशा के काल में समा जाता हैं। बीते चार वर्षो में इन घटनाओं ने किसी भयानक बीमारी की तरह दुगनी तेज़ी से अपने पैर पसारे हैं। प्रशासन की अनभिज्ञता एवं कमज़ोर कानून व्यवस्था के चलते ऐसे असामाजिक तत्व प्रदेश में तेज़ी से बढ़ रहें हैं। हाल में ही आयी नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो की रिपोर्ट के अनुसार उत्तर प्रदेश में 25.49 लाख मामले दर्ज किए गए हैं, जोकि शीर्ष पर हैं। अत्यधिक अपराधिक गतिविधियों के कारण उत्तर प्रदेश में गुंडा एक्ट के अंतर्गत प्रत्येक वर्ष सात से आठ लाख मामले दर्ज किए जाते हैं, जोकि सीधे तौर पर यह इंगित करता है कि प्रदेश की कानून व्यवस्था कितनी ज्यादा ख़राब है। हत्या एवं लूट-पाट को शह देने में सरकार एवं उसके विधयाकों का पूरा सहयोग है। जिसके कारण आज समाज में ऐसे असामाजिक तत्व हर ओर बढ़ रहे है। आगामी विधानसभा चुनाव में प्रदेश की जनता सत्तापलट कर इस तथ्य को उजागर कर देगी के बहुजन समाज पार्टी के कार्यकाल में किस कदर सशक्त कानून व्यवस्था को बहाल किया जाता हैं।